75 प्रतिशत छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा पसंद नहीं, दो सर्वे में पता लगा कि स्टूडेंट्स क्लास रूम की पढ़ाई बेहतर मानते हैं

दैनिक भास्कर

Apr 28, 2020, 11:10 AM IST

कोरोना वायरस महामारी के कारण कई देशों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। अमेरिका में कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने नए तरीके आजमाने की शुरुआत कर दी है। क्लिंटन, न्यूयॉर्क में हेमिल्टन कॉलेज ने फैकल्टी सदस्यों के लिए चलते-फिरते वाई-फाई स्टेशन बनाए हैं। वर्जीनिया टेक में संगीत की पढ़ाई करने वाले छात्रों को टिक टॉक वीडियो बनाने का काम सौंपा गया है। पेनसिल्वानिया, ईस्टन में कॉलेज फैकल्टी कार्ड बोर्ड और रबर बैंड का उपयोग कर दस्तावेजी कैमरे बना रही है। इसके साथ चर्चा चल पड़ी है कि क्या छात्र वास्तविक कॉलेज कैंपस से वर्चुअल क्लास रूम की तरफ बढ़ेंगे। लेकिन, संकेत हैं कि ऐसा नहीं होगा। दो सर्वेक्षणों में 67 से 75 प्रतिशत छात्रों ने क्लास रूम की पढ़ाई को बेहतर बताया है।

67 % स्टूडेंट्स को पसंद क्लास रूम की पढ़ाई

विशेषज्ञों का कहना है, ऑनलाइन शिक्षा का कुछ महत्वपूर्ण प्रभाव तो पड़ेगा। फैकल्टी अब परंपरागत क्लास मेंं पहले की तुलना में डिजिटल साधनों का अधिक उपयोग करेगी। वैसे, जरूरी नहीं है कि सभी छात्र ऑनलाइन अनुभव को पसंद करेंगे। ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी कराने वाली संस्था वन क्लास ने 1300 छात्रों का सर्वे किया था। 75% से अधिक छात्रों ने कहा, इस तरह की पढ़ाई उच्चस्तर की नहीं है। स्कूल, कॉलेजों की रेटिंग करने वाली वेबसाइट niche.com ने अप्रैल की शुरुआत में 14 हजार कॉलेजों में ग्रेजुएट छात्रों का सर्वे किया था। 67% छात्रों ने कहा कि ऑनलाइन क्लास आमने-सामने पढ़ाई के मुकाबले बेहतर नहीं है।

पेचीदा टेक्नोलॉजी ढांचे की जरूरत

रिसर्च फर्म एड वेंचर्स के मुख्य रिसर्च अधिकारी रिचर्ड गैरेट कहते हैं, 18 वर्ष के छात्र के लिए ऑनलाइन उच्च शिक्षा साधारण हो सकती है, लेकिन नौकरी करने वाले और शादी-शुदा लोग इस माध्यम को उपयोगी मानेंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है। उच्च स्तर के ऑनलाइन कोर्स या प्रोग्राम को तैयार करने और फैकल्टी की ट्रेनिंग में एक साल का समय लगता है। फिर छात्रों को इसके लिए तैयार करना पड़ता है। इस सिस्टम के लिए पेचीदा टेक्नोलॉजी ढांचे का निर्माण करने की जरूरत पड़ेगी।

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