6वीं से 8वीं के लिए एनसीईआरटी का अल्टरनेटिव अकेडमिक कैलेंडर जारी, दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए ऑडियो बुक्स भी उपलब्ध

  • मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने दिल्ली में जारी किया कैलेंडर
  • कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल के चैप्टर वाइज मटेरियल को भी शामिल किया है

दैनिक भास्कर

Apr 24, 2020, 10:11 AM IST

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने गुरूवार को दिल्ली में 6वीं से 8वीं के लिए अल्टरनेटिव अकेडमिक कैलेंडर जारी किया। नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल रिसर्च और ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दिए दिशा-निर्देश के मुताबिक यह अकेडमिक कैलेंडर बनाया है। इससे कोविड-19 के कारण लॉकडाउन में बच्चे घर में, पैरेंट्स और टीचर्स की मदद से, पढाई कर सकेंगे। इससे पहले 16 अप्रैल को पहली से 5वीं के लिए यह कैलेंडर जारी किया था।

बिना इंटरनेट पढ़ाने के सुझाव शामिल

इस कैलेंडर में पढ़ाई को ज्यादा इंट्रेस्टिंग और मीनिंगफुल बनाने के लिए विभिन्न तकनीक और सोशल मीडिया उपकरण मौजूद हैं, जिसके इस्तेमाल से बच्चे घर पर बिना रुकावट अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। इसके साथ ही इस केलैंडर में बिना इंटरनेट के टीचर्स मोबाइल पर एसएमएस भेज कर या फोन कर के कैसे पढ़ा सकते हैं, इसके दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। 

दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए मटेरियल उपलब्ध

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, “जल्द ही मंत्रालय बाकि की कक्षाओं 9 से 12 और सभी विषयों को भी इस कैलेंडर में शामिल करेगा। इस कैलेंडर में बच्चों के सीखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए दिव्यांग बच्चों को भी जुड़ने की सुविधा दी है। दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए इस कैलेंडर में ऑडियो बुक्स, रेडियो कार्यक्रमों आदि द्वारा शिक्षा प्रदान किये जाने की सुविधा है।”

कैलेंडर में चार भाषाएं शामिल

कैलेंडर में तनाव और चिंता को दूर करने के तरीके भी सुझाये गए हैं। फिलहाल इसमें चार भाषाओं के विषयों को शामिल किया गया है- संस्कृत, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी। इसके साथ ही इस वैकल्पिक कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर चैप्टर वाइज उपलब्ध मटेरियल को भी शामिल किया गया है।

कैलेंडर को लेकर कोई बाध्यता नहीं

साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि इस कैलेंडर पर उपलब्ध सभी गतिविधियां सुझाव के तौर पर शामिल की गईं हैं न कि किसी आदेश की तरह थोपी गई हैं। इसके लिए किसी के ऊपर कोई बाध्यता नहीं है। टीचर और पैरेंट्स बिना क्रम पर ध्यान दिए स्टूडेंट्स की रुचि वाली गतिविधि का चयन कर सकते हैं।

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