सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- 10वीं और 12वीं के बचे हुए पेपर नहीं होंगे, पिछली 3 परीक्षाओं के आधार पर स्टूडेंट्स का असेसमेंट हो सकता है

  • CBSE ने 18 मार्च को 12वीं की एग्जाम टाल दी थी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 10वीं के भी 6 पेपर नहीं हो पाए थे
  • इस तरह 10वीं और 12वीं के कुल 29 सब्जेक्ट के पेपर बाकी थे, इनकी एग्जाम 1 से 15 जुलाई के बीच होनी थी

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 03:13 PM IST

सीबीएसई ने कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से 10वीं और 12वीं के बचे हुए पेपर रद्द करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई में बोर्ड की तरफ से सरकार ने यह जानकारी दी। अब स्टूडेंट्स का असेसमेंट उनके पिछले 3 एग्जाम के आधार पर होगा। वे बचे हुए पेपर बाद में भी दे सकेंगे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आईसीएसई बोर्ड ने भी 10वीं और 12वीं बोर्ड के एग्जाम रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन वह स्टूडेंट्स को बाद में पेपर देने का विकल्प नहीं देना चाहता। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

  • 12वीं की परीक्षा के बारे में सीबीएसई नोटिफिकेशन जारी करे।
  • अभी इंटरनल असेसमेंट और बाद में बचे हुए पेपर देने का विकल्प दिया जाए।
  • रिजल्ट घोषित करने की तारीख बताई जाए।
  • स्टेट बोर्ड में एग्जाम्स किस तरह होंगे, इस पर केंद्र स्थिति साफ करे।
  • सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार सुबह 10:30 बजे फिर सुनवाई करेगा।

सीबीएसई के फैसले के बाद आगे क्या? स्टूडेंट्स के पास क्या विकल्प हैं?
इंटरनल असेसमेंट 

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जब बच्चे 10वीं और 12वीं के बचे हुए पेपर नहीं दे पाएंगे तो नई स्कीम के तहत ऐसे स्टूडेंट्स का असेसमेंट उनके पिछले 3 एग्जाम के आधार पर होगा।

बाद में एग्जाम्स
स्टूडेंट्स बाद में एग्जाम देने का विकल्प भी चुन सकेंगे ताकि वे अपना रिजल्ट और सुधार सकें। सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जैसे ही माहौल सुधरेगा, 12वीं के स्टूडेंट्स अपने बचे हुए पेपर दे सकेंगे। हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि अलग-अलग राज्यों में माहौल सुधरने की संभावना अलग-अलग हाेगी। क्या केंद्र सरकार इसे देखेगी या राज्य देखेंगे? 

नया एकेडमिक ईयर और एडमिशंस
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि नया एकेडमिक ईयर कब से शुरू करेंगे, यह साफ होना चाहिए। अगर अगस्त में एग्जाम्स होंगे, तो एकेडमिक ईयर सितंबर से शुरू होना चाहिए। इस पर सीबीएसई की तरफ से बताया गया कि जितना जल्द मुमकिन होगा, रिजल्ट घोषित किए जाएंगे। उम्मीद है कि इसी महीने हम रिजल्ट घोषित कर देंगे। असेसमेंट के बेसिस पर स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

परीक्षाएं रद्द करने के पीछे की 3 वजह
1. कोरोना के मामले बढ़ रहे, स्कूल क्वारैंटाइन सेंटर बन गए

10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले बच्चों के पैरेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बोर्ड को एग्जाम्स रद्द कर देना चाहिए। इसमें यह दलील दी गई कि सीबीएसई विदेशों में मौजूद 250 स्कूलों की परीक्षाएं रद्द कराने का फैसला पहले ही ले चुका है तो देश में भी बचे हुए पेपर रद्द होने चाहिए।

2. कई स्कूल क्वारैंटाइन सेंटर बन गए
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था कि दिल्ली में परीक्षाएं कराने के लिए स्कूलों में अभी जगह नहीं है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सीबीएसई और सरकार की तरफ से दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि कई स्कूलों को क्वारैंटाइन सेंटर बनाया जा चुका है। ऐसे में लॉजिस्टिक से जुड़े कई मसले हैं। 

3. तीन राज्य अभी एग्जाम नहीं चाहते थे
सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई के दौरान बताया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर पिटीशन के अलावा महाराष्ट्र, दिल्ली और ओडिशा सरकार ने पिछले दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय को चिट्‌ठी लिखकर कहा था कि परीक्षाएं रद्द कर देनी चाहिए।

इन 3 एग्जाम्स के बारे में स्थिति साफ होना बाकी

  • जेईई मेन – 18 जुलाई से 23 जुलाई। इसी एग्जाम के बेस पर स्टूडेंट्स जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई होते हैं। जेईई मेन के जरिए एनआईटी, सरकारी और प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिलता है। इसमें 9 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल होते हैं।
  • नीट – 26 जुलाई। इसके जरिए सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन मिलता है।
  • जेईई (एडवांस्ड) – 23 अगस्त। सिर्फ 2.5 लाख स्टूडेंट्स जेईई मेन के बाद एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई कर पाते हैं। इसके जरिए 23 आईआईटी में एडमिशन मिलता है।

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