सिविल सर्विसेज आवेदन वापस ले सकते हैं उम्मीदवार, 18 मार्च तक है मौका

  • सिविल सर्विसेस 10 लाख से अधिक उम्मीदवार करते हैं आवेदन, परीक्षा में सिर्फ 50% उपस्थित
  • पहली बार यूपीएससी ने दिया फॉर्म भर चुके अभ्यर्थियों को विकल्प 

दैनिक भास्कर

Mar 15, 2020, 12:39 PM IST

एजुकेशन डेस्क. यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) ने हाल ही में अलग-अलग परीक्षाओं के लिए फॉर्म वापस लेने की प्रक्रिया (विद्ड्रॉअल) शुरू की है। इसमें सिविल सर्विसेस एग्जाम भी शामिल है। यूपीएससी का कहना है कि प्री- परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले 10 लाख में से मात्र 50 प्रतिशत उम्मीदवार ही एग्जाम में शामिल होते हैं। कमीशन को वेन्यू, प्रिंट पेपर व परीक्षकों की व्यवस्था करनी होती है।

ऐसे में यूपीएससी का तर्क है कि अगर गंभीर उम्मीदवार ही आवेदन करें तो वह उन्हें बेहतर सुविधाएं दे पाएगा। आयोग ने उन उम्मीदवारों को विदड्रॉअल फैसिलिटी 12 से 18 मार्च तक दी है, जो परीक्षा में अपीयर नहीं होना चाहते। जो परीक्षा देने जा रहे हैं उन्हें यूपीएससी ने सलाह दी है कि वे रजिस्ट्रेशन आईडी के साथ अपनी सबमिट की गई रजिस्टर्ड एप्लीकेशन की पूरी डिटेल दें। अधूरी एप्लीकेशन में विद्ड्रॉअल नहीं होगा। सिविल सर्विसेज एग्जाम एक्सपर्ट एलेक्स एंड्रूज जॉर्ज से जानें विद्ड्रॉअल की प्रक्रिया।

जान लें आवेदन के नियम
विदड्रॉअल से पहले आपका रजिस्टर्ड नंबर और सबमिट की गई ईमेल आईडी एक्टिव होनी चाहिए। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर अलग ओटीपी भेजे जाएंगे। ये सिर्फ 30 मिनट तक वैलिड होंगे। विदड्रॉअल रिक्वेस्ट तभी मान्य होगी जब यह ओटीपी डिटेल वैलिड हो जाएगी। ओटीपी जनरेट करने की रिक्वेस्ट 18 मार्च को शाम साढ़े पांच बजे तक स्वीकृत होगी। एप्लीकेशन वापस लेने की रिक्वेस्ट के स्वीकृत होने के बाद कैंडिडेट को रसीद लेनी होगी। एक बार एप्लीकेशन के विदड्रॉ होने के बाद भविष्य में इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता। इस प्रक्रिया के सफलता पूर्वक होने के बाद एक ऑटो जनरेटेड ईमेल और एसएमएस कैंडिडेट के रजिस्टर्ड ईमेल आईडी व मोबाइल पर आएगा। अगर बिना रिक्वेस्ट के आपके पास कोई मैसेज आता है तो तुरंत [email protected] पर संपर्क करें।

फीस नहीं होगी रिफंड
विद्ड्रॉअल पर फीस रिफंड नहीं होगी। आवेदन वापस न लेने पर क्या यूपीएससी अटैम्प्ट की गिनती करेगा या नहीं? इसे लेकर आयोग ने स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यूपीएससी ने खर्च को कम करने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई है।

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