लॉकडाउन यानी बड़ों के साथ 24 X 7 रहना, टीनएजर्स के लिए बुरा सपना है इन दिनों लगातार घर में ही रहना

दैनिक भास्कर

Apr 26, 2020, 10:10 AM IST

आपके टीनएजर ने जब लॉकडाउन होने या बढ़ने पर ऐसा कहा होगा, तो आपको जरूर बुरा लगा होगा। लेकिन उनकी उम्र पर गौर करेंगे, तो समझ जाएंगे कि यह नॉर्मल बात है। इस दौरान आप उसे समझने के बेहतर मौके पाएंगे।

टीनएजर्स के दिमाग वयस्कों से दिमाग से अलग काम करते हैं। आजाद रहना और निर्भीक फैसले लेना उनके दिमाग के केंद्र में रहता है और यह भी ध्यान दीजिए कि इस उम्र में वे त्वरित व्यवहार करते हैं, सोचकर फैसला करने पर नहीं। इसे ध्यान से समझें, तो टीनएजर्स आज में जीने, मौज-मस्ती करने और हर हद तक खुद को आजमाकर अपनी पहचान बनाने में जुटे रहते हैं। नियमों से उनका वास्ता नहीं, और यही वजह है कि उन्हें लॉकडाउन की बंदिशें एक आंख नहीं सुहा रहीं हैं।

पहले समझिए कि टीनएजर्स को आखिर क्या परेशान कर रहा है –

  • सोशल कॉन्टैक्ट का ना होना।
  • दोस्तों से दूरी।
  • पर्सनल स्पेस की कमी।
  • रोका-टोकी से ना भाग पाना।
  • हर समय पढ़ाई या करिअर की बातें। सामान्य दिनों में तो इनसे भागकर हैंगआउट कर लेते या दोस्तों से मिलकर हंसी में उड़ा देते हैं।
  • तनाव की मौजूदगी।

पैरेंट्स क्या कर सकते हैं?

  • टीनएजर से खुलकर बात करें कि लॉकडाउन में क्या अच्छा नहीं लग रहा है। कई बार बच्चे खुलकर अपनी बात रख पाते हैं। आप उनकी इस तरह मदद भी कर सकते हैं –
  • उनको दोस्तों या ऐसे रिश्तेदारों से कॉन्टैक्ट बनाने में मदद कीजिए, जिनके वे करीब हैं। उनके लिए ग्रुप कॉल्स प्लान करें।
  • कोविड के बारे में बात करें लेकिन उसे डरावना बनाकर न पेश करें।
  • उन्हें स्पेस दीजिए। घर के अन्य बड़ों या छोटे बच्चों से अलग थोड़ी देर के लिए उनका कॉन्फिडेंशियल स्पेस होना जरूरी है।
  • ढेर सारे काम उन पर न थोपें। जितनी मदद वे खुशी से करें, उतनी करवाएं। उसके लिए उन्हें छोटे पुरस्कार भी दें। यह ईनाम उनकी मदद की अवधि बढ़ाएंगे। उन्हें बताएं कि अलग-अलग तरह के काम करने से मन भी लगा रहेगा और तनाव भी दूर रहेगा।
  • टीनएजर्स को हेल्दी खाने और व्यायाम के नियम सिखाने का यह बेहतरीन समय है। इसमें उनकी मदद कीजिए। डांटकर नहीं, बल्कि खुद फॉलो करके उन्हें सिखाएं।
  • हर समय कुछ न कुछ काम करते रहने को न कहें। उनसे जो भी काम हो, एक रुटीन की तरह, सुबह ही बता दें।
  • टीनएजर्स में लॉकडाउन के बाद की लाइफ को लेकर काफी अकुलाहट है। इसे पहचानिए और उनसे खुलकर बात कीजिए।
  • अपने टीनएज बच्चे को बताइए कि महामारी का यह दौर स्थायी नहीं है। यह सब खत्म होगा और हम थोड़ी बदली हुई दिनचर्या और जीवनशैली को लेकर फिर से सामान्य जीवन जिएंगे।
  • बदली हुई जीवनशैली के बारे में बच्चों से कभी-कभी बात करते रहें। उनका मन इस बदलाव की तैयारी कर लेगा।

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