पांच सालों में डेंटिस्ट्री से ग्रेजुएशन करने वाले छात्र 66.25% बढ़े, एआई आने के बाद बदल रहा इंडस्ट्री का स्वरूप

दैनिक भास्कर

Mar 06, 2020, 10:31 AM IST

एजुकेशन डेस्क. पांच सालों में देश भर में डेंटिस्ट के ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या में 66.25% बढ़ोतरी हुई है। वहीं अगर पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स की बात करें तो यहां पांच सालों में एडमिशन की संख्या 80.31% बढ़ी है। इस फील्ड में सिर्फ स्टूडेंट्स की संख्या ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि मेडिकल इंडस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि डेंटिस्ट्री एक मजबूत होता कॅरिअर विकल्प है। मोरूला हेल्थ टेक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल डेंटल मार्केट 5% की दर से तरक्की कर रहा है। 
वहीं एशिया के डेंटल मार्केट में 10% की ग्रोथ दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले डेंटल इंडस्ट्री सिर्फ ओरल समस्याओं तक सीमित थी, लेकिन अब यह लाइफ स्टाइल और फैशन का भी हिस्सा है। 6 मार्च को देश में नेशनल डेंटिस्ट डे के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर डेंटिस्ट्री में पिछले एक दशक में हुए प्रमुख बदलावों और नए कॅरिअर विकल्पों के बारे में बता रहें हैं फील्ड के एक्सपर्ट्स।

ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन की रिपोर्ट के मुताबिक

  • साल 2018-19 में डेंटिस्ट के ग्रेजुएशन कोर्स में 94,800 स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया।
  • वहीं साल 2012-13 में यह संख्या 62,808 थी। 

ओरल हेल्थ को लेकर अवेयरनेस बढ़ने से डेंटिस्ट बना बेहतर कॅरिअर विकल्प
प्रसिद्ध डेंटिस्ट डॉ. पूनम नागपाल (एमडीएस) के अनुसार लगभग एक दशक पहले तक लोग ओरल प्रॉब्लम्स के बाद ही डेंटिस्ट की सेवाएं लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जनरल ओरल हाईजीन को लेकर भी अवेयरनेस बढ़ रही है। इसके चलते रेगुलर ओरल चेकअप के लिए भी लोग डेंटिस्ट के पास जाने लगे हैं। इसका सीधा फायदा डेंटिस्ट कॅरिअर की सफलता के रूप में देखा जा सकता है। रेगुलर चेकअप के अलावा अब ग्रूमिंग के लिए भी डेंटिस्ट का सहारा लिया जा रहा है। यही वजह है कि कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में भी डेंटिस्ट्स के लिए कॅरिअर के अवसर खुल गए हैं।

विकसित देशों की तुलना में कॉस्ट इफेक्टिव है भारत की डेंटल सर्विस, बढ़ी मांग
पिछले एक दशक से भारत में प्रचलन में आईं डेंटिस्ट्री की तीन ब्रांचेज ऐसी हैं, जिनकी मांग दुनिया में सबसे ज्यादा है। इनमें डिजिटल स्माइल डिजाइन, डेंटल इम्प्लांट और फॉरेन्सिक ऑरेन्टोलॉजी शामिल हैं। भारत में फॉरेन्सिक ऑरेन्टोलॉजी का उपयोग निर्भया केस में भी देखने को मिला, जहां बाइट मार्क्स के जरिए अपराधियों की पुष्टि की गई थी। इस केस में दिल्ली पुलिस की मदद करने वाली एक्सपर्ट्स की टीम का हिस्सा रहे डॉ. सौरभ नागपाल ( एमडीएस) बताते हैं कि फॉरेन्सिक ऑरेन्टोलॉजी एक ऐसी स्पेशलाइजेशन है, जो आने वाले समय में डेंटिस्ट्स के लिए कॅरिअर के कई नए अवसर खोलेगी।

इसके अलावा फुल डेंटल इम्प्लांट, डेंटल टूरिज्म और ऑल ऑन फोर, डेंटिस्ट्री की ऐसी सर्विसेज हैं, जिनके लिए विदेश से भी लोग भारत आ रहे हैं। इसके पीछे का कारण विकसित देशों की तुलना में इनका भारत में कॉस्ट इफेक्टिव होना है। डेंटिस्ट्री में कॅरिअर देख रहे स्टूडेंट्स के लिए इनमें से किसी एक स्पेशलाइजेशन को चुनना ही बेहतर होगा।

शुरू हो रहा है रोबोटिक्स का इस्तेमाल
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस की डायरेक्टर प्रो. संगीता तलवार बताती हैं कि पिछले दशक में जहां भारत में डेंटिस्ट्री की फील्ड में तेजी से तकनीकी विकास हुआ, वहीं अब वर्तमान दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रवेश के संकेत मिलने लगे हैं। ओरल ट्रीटमेंट में रोबोटिक्स के इस्तेमाल को लेकर देश में कई शोध चल रहे हैं, जिनके परिणाम अगले 2-3 सालों में ही दिखाई देने लेगेंगे। हालांकि काफी लंबे समय से भारत में अपेक्स लोकेटर जैसी डिवाइस का उपयोग होता रहा है, यह ऐसा समय था जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर हमारी अवेयरनेस कम थी। ऐसा माना जा रहा है कि एआई की कुछ तकनीकों का इस्तेमाल हम काफी पहले से कर रहे हैं, इन्हें अब विस्तार देने की जरूरत है।

स्पेशलाइजेशन से ज्यादा स्किल्स का है महत्व
ग्रेजुएशन के बाद स्टूडेंट्स के लिए डेंटिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन का चुनाव काफी कठिन सवाल है। इसके जवाब में डेंटिस्ट डॉ. सुमंतो बागची का कहना है कि पहले स्टूडेंट्स को यह तय करना होगा कि वे क्लीनिकल कॅरिअर में जाना चाहते हैं या फिर एकेडमिक कॅरिअर में। अगर स्टूडेंट्स का रुझान क्लीनिकल की तरफ है, तो स्पेशलाइजेशन से ज्यादा स्किल्स का महत्व है। क्लीनिकल प्रैक्टिस में डेंटिस्ट का स्किल्ड होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इंश्योरेंस सेक्टर में हायर किए जा रहे हैं डेंटिस्ट
डेंटिस्ट्स का कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। यानी इस फील्ड में आने वाले युवाओं का कॅरिअर अब सिर्फ क्लीनिक्स और हॉस्पिटल्स तक सीमित नहीं है। इंश्योरेंस सेक्टर में भी डेंटिस्ट्स को ऑनरोल हायर किया जाने लगा है। इन डेंटिस्ट्स का काम उन लोगों का ट्रीटमेंट या चेकअप करना है जिन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस कराया है।

एक नजर में जानें डेंटिस्ट बनने का सफर
1. एनटीए द्वारा कराई जाने वाली नीट परीक्षा के जरिए बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) कोर्स में एडमिशन पा सकते हैं।
2. नीट (पीजी) के जरिए डेंटिस्ट के विभिन्न पीजी कोर्सेस में एडमिशन लिया जा सकता है।
3. ग्रेजुएशन के बाद पीजी ही करना अनिवार्य नहीं है। कई सरकारी और प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स पीजी डिप्लोमा और पीजी सर्टिफिकेट कोर्स भी कराते हैं, जिन्हें यूजी के बाद किया जा सकता है।

सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर पीजी तक के विकल्प

  • सर्टिफिकेट कोर्स- डेंटल हाइजीनिस्ट सर्टिफिकेट कोर्स, डेंटल मैकेनिक सर्टिफिकेट कोर्स और डिप्लोमा कोर्स इन डेंटल असिस्टेंस।
  • ग्रेजुएशन- बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी।
  • पीजी में स्पेशलाइजेशन के विकल्प – प्रोस्थोडॉन्टिक्स, पीरियोडॉन्टिक्स, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स, ऑर्थोडॉन्टिक्स एंड डेंटोफेशियल ऑर्थोपेडिक्स, ओरल पैथोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी डेंटिस्ट्री, पेडोडॉन्टिक्स एंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री, ओरल मेडिसिन डायग्नोसिस एंड

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