क्या सेल्फ स्टडी से डेटा साइंटिस्ट बन सकते हैं? इस फील्ड के हायरिंग परिदृश्य को समझ इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए ध्यान रखें कुछ बातें

  • प्रोजेक्ट्स पर काम करें ताकि सीखी गई स्किल्स की प्रैक्टिस हो सके और भावी एम्प्लॉयर को यह जान सके कि आपको कितनी जानकारी है
  • मेंटर की मदद लेना आपके लिए जरूरी नहीं है लेकिन डेटा साइंस सीखने में आसान नहीं है इसलिए मेंटर्स की मदद ले सकते हैं

दैनिक भास्कर

May 06, 2020, 11:00 AM IST

अगर आप डेटा साइंस में सेल्फ स्टडी से खुद को एक प्रोफेशनल के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं तो आपको इस फील्ड के हायरिंग परिदृश्य को समझना होगा। जहां कई आईटी सर्विसेज कंपनियां फॉर्मल एकेडमिक बैकग्राउंड को मान्यता देती हैं, वहीं लिंक्डइन कैंडिडेट्स को केवल उनके स्किल सेट के आधार पर हायर करती है। ऐसे में सेल्फ स्टडी से इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना हाेगा।

स्किल्स अप्लाई करेंं

प्रोजेक्ट्स पर काम करें ताकि सीखी गई स्किल्स की प्रैक्टिस हो सके और भावी एम्प्लॉयर को यह जान सके कि आपको कितनी जानकारी है। Kaggle और GitHub जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अपना डेटा साइंस पोर्टफोलियो क्रिएट करें। स्टार्टअप्स ही नहीं दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भी हायरिंग के लिए इनका उपयोग कर रही हैं।

मेंटर्स की मदद लें

मेंटर की मदद लेना आपके लिए जरूरी नहीं है लेकिन डेटा साइंस सीखने में आसान नहीं है इसलिए अपनी पढ़ाई को प्लान करते हुए मेंटर्स या इस फील्ड का अनुभव रखने वाले लोगों से मदद लेने की सलाह विशेषज्ञ भी देते हैं। मेंटर्स न केवल आपको शुरुआत में ही इस फील्ड की मुश्किलों से अवगत करवाते हैं बल्कि सही लर्निंग के लिए गाइडेंस भी देते हैं।

सही सर्टिफिकेशन लें

सबसे पहले उन सभी स्किल्स की लिस्ट बनाएं जो आपको सीखनी हों ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यहां मौजूद स्टैटिस्टीशियन से लेकर मशीन लर्निंग एक्सपर्ट और बिजनेस एनालिस्ट से लेकर डेटा विजुअलाइजेशन तक अलग-अलग जॉब रोल्स के लिए आपको कौन सी स्किल्स सीखनी होंगी। इसी के अनुसार आगे का प्लान बनाएं।

अनुभव हासिल करें 

शॉर्ट-टर्म फ्रीलांस गिग्स के जरिए कॉर्पोरेट एक्सपीरिएंस हासिल कर सकते हैं। इंटरव्यू में इसके लिए बोनस पॉइंट्स मिल जाते हैं। असल में किसी कंपनी के डेटा सेट को हैंडल करने में आपको इंजीनियर्स व अन्य डिपार्टमेंट्स के साथ मिलकर काम करना होता है और गहराई से इसकी बिजनेस वैल्यूको भी समझना होता है। यह सब आपको कई वर्षों के अनुभव के बाद ही आता है।

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