कोटा से लौटे स्टूडेंट्स ने सुनाई आपबीती, बोले- ज्यादातर के पास स्मार्ट फोन नहीं थे, इसलिए ऑनलाइन क्लास भी नहीं कर पा रहे थे

  • कोटा से 44 छात्र और 7 अभिभावक बस से घर लौटे, प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करेंगे
  • छात्र बोले – लौटकर अच्छा तो लग रहा है, लेकिन मां को गले नहीं लगा पा रहे, परिवार से दूर रहना अखर रहा है

दैनिक भास्कर

Apr 25, 2020, 10:37 AM IST

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए कोटा में रह रहे 44 विद्यार्थी और 7 अभिभावक गुरुवार तड़के भोपाल लौट आए। उन्हें घरों में ही आइसोलेट किया गया है। घर वापसी से सभी खुश हैं, क्योंकि कोटा में एक कमरे में कैद होकर रह गए थे। खाने-पीने की दिक्कत नहीं थी, लेकिन 70 फीसदी के पास स्मार्ट फोन नहीं थे। इस वजह से ऑनलाइन क्लास भी नहीं कर पा रहे थे। यही वजह है कि सब किसी भी तरह लौटना चाहते थे। यहां आकर राहत तो मिली, लेकिन घरवालों से दूरी बनाकर रहना अखर रहा है।

सेल्फ स्टडी पर भी फोकस नहीं कर पा रहे थे

एक ही कमरे में बंद रहने से पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पा रहे थे। साथ के 70 प्रतिशत छात्र कीपेड मोबाइल का ही उपयोग करते हैं। इंस्टीट्यूट ने ऑनलाइन टेस्ट,स्टडी शुरू की तो उसमें शामिल नहीं हो पा रहे थे। इंस्टीट्यूट में सभी एक्टिविटी ऑफलाइन होती थी। इसलिए स्मार्टफोन से दूर रहते थे। दूसरी बार लॉकडाउन की घोषणा के बाद भोपाल पास बनवाने की कोशिश की थी। लेकिन सफल नहीं हो पाया। अब इंस्टीट्यूट की ऑनलाइन टेस्ट सीरिज में शामिल हाे सकेंगे। – शुभम पटेल

टेस्ट देने के लिए रुके थे, लेकिन नहीं दे पाए

मैं नीट की तैयारी कर रही थी। हॉस्टल में 100 लड़कियां थी, जिनमें से करीब 10 मप्र की हैं। इतने दिन एक रूम में बंद रहे। टेस्ट देने के लिए रुके थे, लेकिन वे ही नहीं दे पा रहे थे। क्लासेस 25 जनवरी को खत्म हो चुकी थी। टेस्ट 31 जनवरी से शुरू हुए थे। आखिरी टेस्ट 10 मार्च हुआ। पांच-छह और टेस्ट बचे थे। इससे पहले दीवाली पर आई थी तो घर आते ही मम्मी-पापा भाई-बहनों को गले लगा लिया था। इस बार उनसे दूर रहना पड़ रहा है। यह अच्छा नहीं लग रहा। -दीक्षा चौहान

प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करेंगे

होस्टल में आम दिनों की तरह की खाना मिल रहा था। इसलिए परेशानी नहीं हुई। कोटा में जैसे-जैसे केस बढ़ रहे थे, माहौल बदल रहा था। इसलिए सभी घर जाना चाहते थे। कोचिंग इंस्टीट्यूट ने ऑनलाइन फार्म भरवाए, जिसमें पूरी जानकारी दी गई। अब घर आ गए हैं तो होम क्वारेंटाइन रहेंगे। प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करेंगे। – प्रवीण गौर

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