कलात्मकता, सृजनशीलता व चुनौतियों से भरा है सिविल इंजीनियरिंग का क्षेत्र

दैनिक भास्कर

Mar 25, 2020, 12:44 PM IST

एजुकेशन डेस्क. सिविल इंजीनियरिंग का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही प्राचीन है। आदि मानव या आधुनिक मानव की जो भी आवश्यकताएं हैं, उनमें सिविल इंजीनियरिंग का योगदान है। रहने के लिए घर, आवागमन के लिए सड़क, हवाई अड्‌डा, बंदरगाह, रेलवे। बाढ़ से बचने एवं सिचाई के लिए बांध व नहरे, पीने एवं अन्य उपयोग के लिए जलप्रदाय, कचरा निस्तारण एवं उपयोग अर्थात मानव सभ्यता के लिए आवश्यक प्रत्येक अधिसंरचना में सिविल इंजीनियरिंग का उपयोग होता है। सिविल इंजीनियर का कार्य मानव की आवश्यकता का आंकलन करके विभिन्न परियोजनाओं की परिकल्पना, डिजाइन, प्राक्कलन, निर्माण उपरांत उनके रखरखाव एवं उपयोग करने तक होता है।

रोजगार के कई अवसर 
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश में आईआईटी, एनआईटी सहित राज्यों के कई संस्थान हैं। सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद इस क्षेत्र में रोजगार की अनेक संभावनाएं सरकारी, अर्ध सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्र में हैं। देश-दुनिया की आबादी की आवश्यकताओं को देखते हुए सिविल इंजीनियरिंग की जरूरत मानव सभ्यता तक बनी हुई है। सिविल इंजीनियरिंग का छात्र निर्माण क्षेत्र में अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है। 

विदेश में पाएं उच्च शिक्षा 
सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद छात्र गेट परीक्षा देकर पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन ले सकता है। साथ ही अन्य सरकारी, सार्वजनिक सेक्टर में नौकरी पा सकते हैं। जीआरई देकर विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। विभिन्न राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय परीक्षा के माध्यम से प्रशासनिक व इंजीनियर पदों पर सेवाएं देने का अवसर मिलता है। सिविल इंजीनियरिंग का क्षेत्र कलात्मकता, सृजनशीलता एवं चुनौतियों से भरा है। इस क्षेत्र में विद्यार्थी जीवन के विभिन्न आयामों से रुबरू होते हैं।

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