अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ भारत लौटे पीयूष ने खड़ा किया लेंसकार्ट डाॅट कॉम

दैनिक भास्कर

Mar 04, 2020, 07:16 PM IST

एजुकेशन डेस्क. लेंसकार्ट्स के फाउंडर व सीईओ पियूष बंसल के पिता एक सीए थे और हर पिता की तरह वे भी चाहते थे कि उनके बच्चे अच्छा पढ़ें और एक सैटल्ड लाइफ जिएं। वे खुद पियूष की पढ़ाई पर ध्यान देते थे। यही वजह रही कि पियूष पढ़ाई में अच्छे थे। स्कूल के बाद उन्होंने कनाडा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन करते ही उन्हें अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में प्लेसमेंट मिल गया। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हुए उनका जॉब रोल बहुत अच्छा था और वे अपने माता-पिता के अनुसार सैटल भी हो गए थे, लेकिन जॉब के दौरान कुछ समय बाद ही वे खुद को बोर महसूस करने लगे।

पसंदीदा काम की खोज में लौटे देश
पियूष का कहना कि वे माइक्रोसॉफ्ट के पहले से ही खुश कस्टमर्स को अधिक खुशी देने को अपने काम से बोरियत महसूस करने लगे और उन्हें कुछ नया करने की इच्छा हुई। इस तरह साल 2007 में वे वापस इंडिया आ गए। उनके इस फैसले से उनके पैरेंट्स बहुत परेशान हुए, लेकिन पियूष ने अपने पसंद के काम की खोज जारी रखी। उन्होंने सबसे पहले सर्च पोर्टल माय कैंपस डॉट कॉम की शुरूआत की। इस वेबसाइट पर स्टूडेंट्स को लिए अकोमॉडेशन्स,बुक्स,कारपूल सर्विसेस और पार्टटाइम जॉब्स के बारे में जानकारी मिलती थी। इस साइट को उन्होंने तीन साल ऑपरेट किया।

शुरू किए एक साथ कई पोर्टल्स
देश में बहुत से ऑनलाइन बिजनेसेज की सफलता को देखते हुए उन्होंने भी एक साथ कई प्रयोग करने का फैसला लिया और लेंसकार्ट डॉट कॉम, जूलरी डॉट काम, वॉचकार्ट डॉट कॉम, बैग्स डॉट कॉम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की शुरूआत की। थोड़े समय बाद इन सभी प्लेटफॉर्म्स पर कस्टमर्स के फीडबैक्स के आधार पर उन्होंने लेंसकार्ट डॉट कॉम पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। लेंसकार्ट आज लेंसेस, आईग्लासेस, सनग्लासेस और अन्य जुड़ी हुई सर्विसेस के लिए सबसे बड़ा ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है।

ऑनलाइन के साथ बनाई ऑफलाइन प्रेजेंस भी
आज भारत के सभी मुख्य शहरों में लेंसकार्ट के ऑफलाइन स्टोर्स उपलब्ध हैं और कंपनी का एनुअल टर्नओवल सौ करोड़ से भी अधिक है। पियूष का मानना है कि यदि आप एक आंत्रप्रेन्योर हैं तो आपकी लाइफ में संघर्ष तो होगा, लेकिन यह आप पर निर्भर करेगा कि आप किस हद तक आगे बढ़ना चाहते हैं और आपके लिए टॉप पर पहुंचना कितना जरूरी है। यंग आंत्रप्रेन्योर्स को पियूष यह सलाह देते हैं कि वे पहले ही दिन से खुद को बॉस न समझें। बिजनेस से जुड़े छोटे-बड़े काम खुद ही करके देखें और सही लोगों को जोड़ें।

 

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